कुमाराकोम – केरल का एक छिपा हुआ गौरव जहां आप खो जाएंगे बैकवॉटर्स की खूबसूरती में

केरल को ‘भगवान का देश’ भी कहा जाता है क्योंकि यहां का प्राकृतिक सौंदर्य बहुत ही मनमोहक है। ऊंचे पहाड़, हरे भरे जंगल, समुद्र तट सब कुछ तो है यहां पर लेकिन जो चीज़ इसे बेमिसाल बनाती है वो है यहां के बैकवॉटर्स। बैकवॉटर्स वो जगहें हैं जहां नदियां मैदान में आकर फैल जाती हैं और झीलों व नहरों का रूप ले लेती हैं। ऐसी ही एक जगह है कुमाराकोम जो केरल का एक ऐसा छिपा हुआ गौरव है जहां आप बैकवॉटर्स की खूबसूरती में खो जाएंगे।

क्या होते हैं बैकवॉटर्स?

जब पश्चिमी घाट से आने वाली नदियाँ समुद्र में मिलने से पहले मैदान में फैल जाती हैं, तो उनका वेग कम हो जाता है। वे झीलों और नहरों का रूप ले लेती हैं। इन्हीं झीलों और नहरों को बैकवॉटर कहा जाता है। केरल में खूब बैकवॉटर्स हैं और कुछ स्थान तो बैकवॉटर्स के लिए प्रसिद्ध भी हैं। इनमें अलेप्पी और पूवार को तो सब जानते हैं, लेकिन एक ऐसा भी स्थान है, जो खूबसूरती में किसी से कम नहीं है। इसका नाम है कुमाराकोम।

कुमाराकोम backwater

कुमाराकोम – प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर

वेम्बनाड लेक केरल की प्रमुख बैकवॉटर झील है। इसके एक किनारे अलेप्पी और दूसरे किनारे कुमाराकोम स्थित है। यह एक छोटा-सा शांत गाँव है पर यहाँ बैकवॉटर का बेहद खूबसूरत नज़ारा देखा जा सकता है।

बर्ड सेंचुरी में प्रकृति का अनुभव करें

कुमाराकोम की बर्ड सेंचुरी लगभग 2 किमी लंबी और आधा किमी चौड़ी है। घने जंगल में बनी पगडंडी पर टहलते हुए आप विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देख सकते हैं।

बोटिंग का अनूठा अनुभव

बैकवॉटर्स में बोटिंग करना बेहद मनोरंजक होता है। आलिशान हाउसबोट या सस्ती नाव से आप इन झीलों और नहरों की सैर कर सकते हैं।

कुमाराकोम house bot

बोटिंग के दो विकल्प होते हैं- एक, लग्जरी मोटरबोट और दूसरा साधारण चप्पू वाली नाव । लग्जरी बोट असल में हाउसबोट होती हैं, जिनमें आप ठहर भी सकते हैं। इनमें कमरे बने होते हैं, आरामदायक कुर्सियां होती हैं, किचन होती है और खाने-पीने का दौर चलता रहता है। कुछ हाउसबोट वातानुकूलित भी होती हैं। इनमें बोटिंग करने का अनुभव अलग होता है। दूसरी तरफ चप्पू वाली नावें एकदम साधारण होती हैं। इनका किराया भी मामूली होता है। ये नावें आराम से चलती रहती हैं और उन संकरे स्थानों पर भी जा सकती हैं, जहां हाउसबोट नहीं जा सकती।

Also Read : भारत का यह गुप्त रहस्यमय राष्ट्रीय उद्यान जहां घूमने पर मिलेगा प्रकृति का वास्तविक आनंद !

कुमाराकोम में ठहरने के विकल्प

कुमाराकोम में आप चाहें तो होमस्टे में रुक सकते हैं या फिर होटलों और रिसॉर्ट में भी रुक सकते हैं। सभी प्रकार के रहने के विकल्प यहां उपलब्ध हैं। कुमाराकोम कोट्टयम जिले में स्थित है और कोट्टयम से इसकी दूरी 15 किमी है। लोकल बस सेवा उपलब्ध है। कोच्चि से कुमाराकोम 50 किमी दूर है। कोच्चि के एर्णाकुलम स्टेशन से कोट्टयम के लिए ट्रेनें भी चलती हैं और बसें भी आसानी से मिल जाती हैं। कोच्चि से टैक्सी भी ले सकते हैं।

कुमाराकोम Lake Resort

 कुमाराकोम भले ही ज्यादा प्रसिद्ध न हो, लेकिन यहां ठहरने के विकल्पों की कोई कमी नहीं है। यहां आप  होम स्टे में ठहर सकते हैं और होटल व रिसॉटों में भी ठहर सकते हैं। इन सबकी जानकारी आपको  ऑनलाइन मिल जाएगी।

Check Kerala Tourism Official Website

सर्दियों में जाना सबसे अच्छा

केरल की यात्रा करने के लिए सर्दियों का मौसम सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि इस दौरान वहां बारिश कम होती है। मार्च से लेकर मई तक भीषण गर्मी पड़ती है और जून से सितंबर तक बारिश का मौसम रहता है। इसलिए अक्टूबर से फरवरी के बीच सबसे अच्छा समय है कुमाराकोम जाने का।

दोस्तों, अगर आप प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं तो कुमाराकोम जाना न भूलें। यहाँ के बैकवॉटर्स आपके दिल को छू लेंगे। यहाँ की यात्रा आपको लंबे समय तक याद रहेगी!

watch kumarakom travel video

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *