‘ऊटी’ : नीलगिरि के कोहरे से ढके पहाड़ों के बीच बसा है स्वर्ग का द्वार

दक्षिण भारत का पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय स्थल ऊटी, नीलगिरि पर्वतमाला की पहाड़ियों में समुद्र तल से 2200 मीटर की ऊँचाई पर अवस्थित है। इसका स्थानीय नाम उदगमंडलम है, लेकिन ब्रिटिश लोगों को इसे उच्चारण में कठिनाई हुई तो उन्होंने इसे ‘ऊटी’ नाम दे दिया।

कोहरे से ढके पहाड़, सुंदर बागीचे और शानदार मौसम ने बना दिया स्वर्ग के समान

यहाँ कहरे से ढके हरे-भरे पहाड़, सुंदर बगीचे और शानदार मौसम का अद्भुत संयोजन इस जगह को स्वर्ग से कम नहीं बनाता। इसलिए ऊटी का जादू कभी फीका नहीं पड़ता।

यह तमिलनाडु में कोयम्बटूर से 85 किमी दूर स्थित है। एक समय यह मद्रास प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी रह चुका है।

सालभर शानदार मौसम का आनंद

ऊँचाई के कारण यहाँ सालभर मौसम बेहद सुहावना रहता है, हालांकि जनवरी-फरवरी में रातें ठंडी हो जाती हैं और तापमान कई बार शून्य से नीचे तक जा सकता है।

बॉटेनिकल गार्डन – लाखों साल पुराने पेड़ का जीवाश्म

ऊटी के प्रसिद्ध बॉटेनिकल गार्डन में लाखों साल पुराने एक पेड़ का जीवाश्म बड़ा आकर्षण है। यहाँ की गुलाबी पैराडाइज़ में अनगिनत प्रकार के सुंदर गुलाब देखे जा सकते हैं। मई में होने वाले समर फेस्टिवल में कलाकार प्रदर्शन भी होते हैं।

ooty tourism official website

एमराल्ड झील – पेड़ों से घिरा सुंदर झील

ऊटी का एक और आकर्षण है एमराल्ड झील, जो पहाड़ियों के बीच हरे-भरे पेड़ों से घिरी हुई है। यहाँ बोटिंग और मछली पकड़ने का आनंद लिया जा सकता है। मई में यहाँ बोट रेस भी होती है।

एमराल्ड झील

डोडाबेट्टा पीक – तमिलनाडु की सबसे ऊँची चोटी

ऊटी से 10 किमी दूर स्थित डोडाबेट्टा पीक नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी है, जो तमिलनाडु की भी सबसे ऊँची चोटी है – इसकी ऊँचाई 2650 मीटर है। ऑब्ज़र्वेटरी से आसपास के दृश्यों का नज़ारा अद्भुत होता है।

Doddabetta Peak

चाय बागान – ऊटी यात्रा अधूरी बिना चाय बागानों के दर्शन

ऊटी और आसपास के क्षेत्र में फैले हुए चाय के बागान इस जगह की खासियत हैं। इन बागानों से गुज़रती सड़कों पर टहलना या गाड़ी चलाना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है। चाय के शौकीन यहाँ की चाय की विभिन्न किस्में खरीद सकते हैं।

चाय बागान - ऊटी

कल्हट्टी जलप्रपात – ट्रेकिंग के लिए एक अच्छा स्थल

कल्हट्टी जलप्रपात ऊटी से 13 किमी दूर है, और यह ट्रेकिंग के लिए एक अच्छा स्थान है। मुदुमलई राष्ट्रीय उद्यान में सफ़ारी भी किया जा सकता है। कोटागिरि पहाड़ी स्टेशन भी शांति प्रेमियों के लिए उपयुक्त है।

Kalhatty Waterfalls

नीलगिरि पर्वत रेलवे – पहाड़ों का नज़ारा ट्रेन से

1908 में बनी नीलगिरि पर्वत रेलवे मेट्टुपलयम से शुरू होकर ऊटी तक जाती है। इस विश्व विरासत रेलवे में सफर करना एक अनूठा अनुभव है।

toy train ooty

इस प्रकार, ऊटी अपने सुहावने मौसम, हरियाली भरे पहाड़ों और आकर्षणों से भरपूर है, जो पर्यटकों को लुभाता रहता है। यहाँ की यात्रा आपको जरूर याद रहेगी।

कब और कैसे जाएँ ऊटी

ऊटी घूमने का बेस्ट टाइम है अप्रैल से जून, जब दिन सुहावने और शामें ठंडी होती हैं। सितंबर से नवंबर का महीना दूसरा ऐसा समय है, जब मानसून की बारिश के अभी-अभी खत्म होने पर चारों तरफ हरियाली होने से पहाड़ियों की सुंदरता अपने चरम पर होती है। दिसंबर से फरवरी का मौसम भी अपनी गुलाबी ठंडक के लिए मशहूर है। इस मौसम में हरे-भरे बगीचों में घूमना, झीलों में बोटिंग करना और आउटडोर एक्टिविटीज एंजॉय करने का अलग ही मजा है।

ऊटी का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कोयंबटूर है, जो यहां से करीब 85 किमी दूर और मैसूर हवाई अड्डा 120 किमी की दूरी पर है। दोनों ही स्थानों से ऊटी सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है और नियमित रूप से बसें चलती हैं। टैक्सी भी आसानी से मिल जाती हैं। ठहरने के लिए ऊटी में लग्जरी रिसॉर्ट्स से लेकर होम स्टे, हर बजट के होटल और गेस्ट हाउस तक सारे ऑप्शन मिल जाते हैं। अगर पीक सीजन में आ रहे हैं तो पहले से बुक करना न भूलें।

Also Read : प्रभु श्रीराम के आगमन की खुशी में अयोध्या करेगा 51 घाटों पर 21 लाख दीप जलाकर स्वागत

दिवाली – धनतेरस धमाका ! त्यौहारों में कारों पर मिल रही है 1 लाख तक की भारी छूट !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *